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निभाना रह गया बाकी।

                
                                                         
                            करूं क्या राब्ता का मैं निभाना रह गया बाकी।।
                                                                 
                            
दरारें भर गई सारी पर छिपाना रह गया बाकी।।
समझ होती तो कर लेते हम भी जान का सौदा,,
बहुत देखी है दुनियाँ पर ज़माना रह गया बाकी।
नज़र मुश्किल से मिलती हैं नज़र जो गौर से देखें,,
तेरा आंखों के खंज़र का चलाना रह गया बाकी।।
सताना किसको कहते है कोई समझाए ये उनको,
अभी तो ज़िन्दा है ये दिल जलाना रह गया बाकी।
गुनाह से दूरियाँ कैसी गुनाह तो रग रग में बसा है,,
कोई कुछ भी कहे लेकिन भुलाना रह गया बाकी।
बड़ी मुश्किल से मिलती हैं दीवाने को दीवानी भी,,
तन्हा कैसे गुजरी शब के बताना रह गया बाकी।।
यूँ ना देख हैरत से के हज़ारों अरमान रह गए देव,,
दिल की कह लिया लेकिन सुनाना रह गया बाकी।
-सुनील देव
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4 घंटे पहले

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