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नज़र ना आता है

                
                                                         
                            इन आंखों में रहता था जो आज नज़र ना आता है।।
                                                                 
                            
सावन की रुत तो आती पर चाँद नज़र ना आता है।।

पहले प्यार के किस्से जब भी याद आए तो रो लूं मै,
सर पर सूरज तो रहता पर आज शज़र ना आता है।

चलते चलते पाँव है घायल कोई नहीं है चारासाज़,,
जान फंसी है बीच खार के इलाज़ नज़र ना आता है।

एक गली थी अंजानी सी लगती थी जो अपनी सी,
कूचे तो लाखों हैं लेकिन मेराज नज़र ना आता है।

ये कैसी हवा चली है जिसको देखो नफ़रत में देव,,
कहने को कहना चाहे पर दाग़ नज़र ना आता है।।

- सुनील देव
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2 महीने पहले

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