गुलों के साथ खारों की मोहब्बत काम आती हैं।।
ज़ुबाँ पर मरने वालों की शहादत काम आती है।।
किसी के नाम की पहचान यूँही होती नहीं यारों,,
मुसलसल चलते रहने की आदत काम आती हैं।।
नहीं अब फ़र्क़ पड़ता है किसी के आने जाने से ,,
रहे बस ज़िंदगी अपनी हिफाज़त काम आती हैं।।
कहाँ किसको फ़िक्र है कोई मर जाए या जी जाए,,
अग़र बेचैन दिल हो तो नज़ाकत काम आती हैं।।
अगर सस्ते में मिल जाए कहां होती कद्र उसकी,
अगर हो ज़हन में डर तो बग़ावत काम आती हैं।।
अभी मेरा वक़्त है बाकी मेरे ये दिन भी बदलेंगे,,
तुम्हें मालूम हो या ना हो शराफ़त काम आती हैं।।
कोई ना देखने आना जो करना है कर लेना देव,,
यहाँ रिश्ता हो या सामाँ तमाज़त काम आती हैं।।
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