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ज़िंदगी भर मौत से ही भगते हुए मर जाएंगे

                
                                                         
                            ज़िंदगी भर मौत से ही भगते हुए मर जाएंगे।।
                                                                 
                            
एक दिन दिल ए दर्द से लड़ते हुए मर जाएंगे।।

ख़ास क्या है आम क्या है ये किसे मालूम है,,
ये हक़ीक़त है मगर के करते हुए मर जाएंगे।।

आइनें में देख कर तू क्यूँ जी चुराता है बता,,
झूठ के इस पेड़ पे सब चढ़ते हुए मर जाएंगे।।

काश हमको भी समंदर से मिला दे अब कोई,,
हम तो दरिया हैं के क्या बहते हुए मर जाएंगे।।

क्या कभी इक आसियां अपना होगा या नहीं,,
यूँही गर सफ़र में रहे तो चलते हुए मर जाएंगे।।

मरना ही जब लाज़मी तो क्यूँ डरे हम मौत से,,
कितना भी बचले मगर बचते हुए मर जाएंगे।।

सब मुबारक़ तुझको तेरा मेरा क्या रखा है देव,,
इश्क़ तुझसे है तो हैं बस करते हुए मर जाएंगे।।
-सुनील देव
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3 महीने पहले

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