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किनारे लग गए होते।

                
                                                         
                            किसी के काम के होते तो सारे बच गए होते।।
                                                                 
                            
ना होते बीच दरिया में किनारे लग गए होते।।
तुम से क्या गिला करना सभी तो गैर है अपने,,
गर दिल में जगह होती तो पुकारे हम गए होते।।
किसी का क्या पता क्या सोचता है मेरे बारे में,,
ख़ुदा का शुक्र है वरना तो मारे हम गए होते।।
किसी की क्या ख़ता होगी हम तो पैदाइशी ऐसे,,
के मर कर ख़ाक़ ना होते सितारें बन गए होते।।
वहीं से बैठकर करते रहे तंज़ ओ गुमाँ हम पर,,
पता होता तुम्हे भी सब जो हमारे घर गए होते।।
दर ओ दीवार ग़म मेरे ये किस काम की हैं अब,,
के होते आज हम भी गर तुम्हारें बन गए होते।।
के अब तो गर्द में तब्दील है हयात अपनी देव,,
ना फिरते दर बदर यूँही जो सँवारे हम गए होते।।
-सुनील देव
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3 घंटे पहले

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