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कट जाए तो अच्छा है।

                
                                                         
                            तेरी यादों के साए में ही कट जाए तो अच्छा है।।
                                                                 
                            
किए थे जो कभी वादे ये मिट जाए तो अच्छा है।।

किसी को अब कहाँ परवाह के मेरी ओर देखेगा,,
मेरे हर एक ग़म की घटाएं छट जाए तो अच्छा है।।

कहाँ मंसूब होते हैं अँधेरों में लिखें अशआर यारों,,
अब बियाबान रस्ता यूं ही कट जाए तो अच्छा है।।

सही सुनते थे के यां कुछ नहीं मिलना मिलने से,,
ख़ुदा अब वहम के बादल हट जाए तो अच्छा है।।

किसी को क्या मिला यारों सभी के हाथ खाली है,,
थमीं जो बूँद पलकों पर सिमट जाए तो अच्छा है।।

उसे क्या फ़र्क़ पड़ता हैं जिसे ना जीना हो मरना,,
वज़न अब अपना भी ये घट जाए तो अच्छा है।।

गुनाह है इश्क़ करना तो सज़ा तो लाज़मी है देव,,
अगर चंद लम्हों में साँसे निपट जाए तो अच्छा है।
-सुनील देव
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2 महीने पहले

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