आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

होना चाहिए

                
                                                         
                            इश्क़ की आदत में भी मेयार होना चाहिए।।
                                                                 
                            
आदमी दिखने में भी बीमार होना चाहिए।।

जानता हूं उसको मैं वो आदमी तो ठीक हैं,,
फिर भी मेरे दोस्त आँखें चार होना चाहिए।।

रातों को जागने से आँखे हो जाएगी ख़राब,,
जलने के वास्ते भी तो तैयार होना चाहिए।।

उल्फ़त में मेरे हाथ अब कुछ आए या नहीं,
दुनियाँ को मेरे नाम से ख़्वार होना चाहिए।।

मरने को तो मर जाऊंगा लेकिन ए मेरे ख़ुदा,,
मरने के वास्ते भी तो मज़ार होना चाहिए।।

रंग बू खुशबू वफ़ा सब देखने में तो ठीक पर,,
इनकी तरह दिल को भी खुद्दार होना चाहिए।।

अब वफ़ा के नाम से भी नफरत हो गई है देव,,
कुछ मिले या ना मिले एक यार होना चाहिए।।

- सुनील देव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर