इश्क़ की आदत में भी मेयार होना चाहिए।।
आदमी दिखने में भी बीमार होना चाहिए।।
जानता हूं उसको मैं वो आदमी तो ठीक हैं,,
फिर भी मेरे दोस्त आँखें चार होना चाहिए।।
रातों को जागने से आँखे हो जाएगी ख़राब,,
जलने के वास्ते भी तो तैयार होना चाहिए।।
उल्फ़त में मेरे हाथ अब कुछ आए या नहीं,
दुनियाँ को मेरे नाम से ख़्वार होना चाहिए।।
मरने को तो मर जाऊंगा लेकिन ए मेरे ख़ुदा,,
मरने के वास्ते भी तो मज़ार होना चाहिए।।
रंग बू खुशबू वफ़ा सब देखने में तो ठीक पर,,
इनकी तरह दिल को भी खुद्दार होना चाहिए।।
अब वफ़ा के नाम से भी नफरत हो गई है देव,,
कुछ मिले या ना मिले एक यार होना चाहिए।।
- सुनील देव
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