ख़्वाहिशों के पेड़ जिस दिन मेरे बड़े हो जाएंगे।।
तुम देखना उस दिन मेरे दुश्मन खड़े हो जाएंगे।।
आज सब गफ़लत में है के क्या करें क्या ना करें,,
गर मोहब्बत ना मिली तो सब बेवडे हो जाएंगे।।
हैं तकल्लुफ़ हिज़्र से अब या आईने से हो खफ़ा,,
दिल जो बदला आपने तो फिर खड़े हो जाएंगे।।
रोशनी की चाह में जो ये जला रहे हो चराग़ तुम,,
मंज़िलें गर ना मिली तो फिर बे पढ़े हो जाएंगे।।
शाम होते ही ये तेरी आँख में कौन उतर आए है,,
इतना भी ना चाहो उन्हें सब सर चढ़े हो जाएंगे।।
चार हर्फ़ों में कहाँ बयाँ हो पाती हैं ग़म ए ज़िंदगी,,
इतना आसान हो गया तो हर बुत खड़े हो जाएंगे।।
दास्तान ए प्यार तो बस रह गया किताबों में देव,,
जिस दिन दिल से कर लिया तो सब बड़े हो जाएंगे
-सुनील देव
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