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दिल उम्र भर।

                
                                                         
                            भूल कर भी भूल ना पाया जिसे दिल उम्र भर।।
                                                                 
                            
आँख में तस्वीर उसकी बनती रही कल रात भर।।

उसकी आदत से तो बरसों से वाकिफ़ था मगर,,
फ़िर भी उम्मीदें वफ़ा जलाता रहा दिल उम्र भर।।

वो नहीं आयेगा अब कभी होता अगर मालूम ये,,
हिम्मतें यूँ टूटकर बिखरती नहीं कल रात भर।।

मैं किसे इलज़ाम देता हर कोई तो सफ़ेदपोश था,,
साँसे भी तो थक हार कर थम गई कल रात भर।।

गुज़र गई वो ऋतु भी आयी थी जो अपने लिए,,
मैं फ़क़त लगाता रहा बस पेड़ अफल उम्र भर।।

अब मुझे उसकी मोहब्बत के तराने मत सुनाओ,,
जिसको पाने की चाह में रोता रहा दिल उम्र भर।।

कौन होता हैं आज वफ़ा की ज़ुबां पे कुर्बान देव,,
हौंसलों के साए भी मुझसे करते रहे छल उम्र भर।
-सुनील देव
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2 महीने पहले

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