तू दूर था तो क्या हुआ दिल में तो रहा।।
एहसान यही ज़िंदगी का मुझपे तो रहा।।
यूँ तो हयात अपनी भी कट गई लेकिन,,
तेरा ख़्याल मेरी माह ए शब में तो रहा।।
मुझे तो अभी भी याद हैं गुज़रे हुए लम्हें,,
सामने नहीं रहा मगर तू लब पे तो रहा।।
मेरी तो कभी गुजरी नहीं तेरे बग़ैर शाम,,
रूबरू नहीं रहा मगर तू दिल में तो रहा।।
आवारगी के नाम भले हम हो गए बर्बाद,,
लेकिन मैं तेरा नाम यूँ ही जपते तो रहा।।
ऐसा भी यहाँ कौन है जो जानता न हो,,
चेहरा ये मेरा अख़बार में छपते तो रहा।।
मुझे तेरे साथ से मिला इतना सुकून देव,,
सारा जहान तेरे नाम से दब के तो रहा।।
-सुनील देव
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