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अभी तो साँस है बाक़ी।

                
                                                         
                            अभी से दूर जा बैठे के अभी तो सांस है बाक़ी।।
                                                                 
                            
नज़र क्यूँ फेर ली तुमने अभी तो साथ है बाक़ी।।
दिखाई दे रहा है क्यूँ अब इन आंखों को वीराना,,
अभी से रो रहे हो क्यूं के अभी बरसात है बाक़ी।।
हर एक कदम पर ठोकरें ही ठोकरें खा रहे हो क्यूँ,
दिखाई क्यूँ नहीं देता के अभी तो चाँद है बाक़ी।।
जुदाई ज़िंदगी से एक दिन तो है लाज़मी अपनी,,
अभी से क्यूँ उदासी है के अभी तो साथ है बाक़ी।।
तौर अपनी नज़रों का कभी कमज़ोर मत करना,,
अब रोना छोड़ दो यारों अभी तो हयात है बाक़ी।।
उसे भी क्या कहें जो देखने भी आया नहीं वापस,,
चलो छोड़ो के क्या करना अभी तो आँख है बाक़ी
कोई आला हो या अदना हमें क्या काम उससे देव,
हम जैसे भी अच्छे हैं के अभी तो सिराज है बाक़ी।
-सुनील देव
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3 घंटे पहले

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