हाल क्या है अपना ये अब आईने से पूछना।।
रंग कैसा है फ़िज़ा का अब आईने से पूछना।।
दास्तां अपनी सुनाकर तुम तो यूँ ही चल दिए,
कैसे गुजरी उम्र अपनी अब आईने से पूछना।।
रास्तें तो मिलते रहे मगर मंज़िलें सब खो गई,,
बूँद बनकर कैसे टपके तब आईने से पूछना।।
आँख में तेरी हज़ारों जब अक्स होंगे रात भर,,
दर्द की अपनी कहानी अब आईने से पूछना।।
ज़िस्म की ना-तुवानी जब जोरों पे होगी कभी,
ज़िंदगानी का सफ़र ये तब आईने से पूछना।।
ख़ाक़ हो जाएंगे हम जब जिस्म होगा ये फ़ना,,
रूह का मेरी ठिकाना तब आईने से पूछना।।
कैसे होता हैं गुज़ारा साँस बिन जिस्मों का देव,,
इश्क़ करके जिंदा रहना तब आईने से पूछना।।
-सुनील देव
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