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बस तुम चाहिए.थी......बस तुम।।

                
                                                         
                            तुम्हारे पास खुश रहने के ,
                                                                 
                            
बहुत से तरीके थीं,
वजहें थीं,
तुम खुश रहने के अवसर
तलाश लेती थीं,
कैसे खुश रहना है जानती थीं,
फिर वो तुम्हारी नजर में,
जायज हो ,न हो,
तुम्हारे कदम रुकते नहीं थे,
तुम खुश रहने के
लिए कहीं भी पहुंच जाती थीं,
उसके लिए तुम्हारे पास
मेरा होना जरूरी नहीं था,
मेरा तुमसे मिलना जरूरी नहीं था,
बात करना, साथ रहना जरूरी नहीं था
साथ हंसना, खाना, सोना जरूरी
नहीं था,,
मगर मुझे ये सब नहीं चाहिए था,
मुझे हंसने ,खाने, सोने
और जिंदगी में खुश रहने के
लिए तुम जरूरी थीं,
सिर्फ तुम,
तुम्हारे साथ होने मात्र से ही
शरीर में कुछ अजीब सा होने
लगता था, सनसनाहट सी
उठने लगती थी,
चेहरे, हाथ की त्वचा खिल
उठती थी ,
आंख में अजीब सी
मादकता तैरने लगती थी,
रोम - रोम तुम्हारे
आस - पास
होने मात्र के एहसास से ही
पुलकित हो उठता था,
जिंदा होने का एहसास होने
लगता था.....क्यों कि
मुझे खुश रहने के लिए
बस तुम चाहिए.थी......बस तुम।।
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39 मिनट पहले

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