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अगर पूछे कोई जिंदगी की परिभाषा

                
                                                         
                            अगर पूछे कोई जिंदगी की परिभाषा
                                                                 
                            
लिखूंगी मै एक अंजान दास्ता
संभाल न पाए कोई इसकी लगाम
बेबस है इसके सामने हर इंसान
खूबसूरती से भरी है इसकी शुरुआत
पर अंत से है हर कोई अज्ञात
भले ही हजार ठोकरों से ये गिराती है
पर अकेले चलना भी यही सिखाती है
कभी अपनो के पास होने की खुशी
कभी अकेले हो जाने का गम
गिराती संभालती है हर बार
जिंदगी है शायद इसी का नाम
 
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2 घंटे पहले

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