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माँ, मुझे शादी नहीं करनी!

                
                                                         
                            माँ, अभी तो मेरे पंखों में थोड़ी उड़ान बाकी है,
                                                                 
                            
इस छोटी-सी दुनिया में मेरी एक पहचान बाकी है।
क्यों मुझे पराया समझकर विदा करने की जल्दी है?
क्या मेरी ख़्वाहिशों की कोई कीमत नहीं, क्या यही मेरी गलती है?
मुझे किसी की चौखट पर सजने की दुल्हन नहीं बनना,
अपनी ही जलती हुई ख़्वाहिशों का श्मशान नहीं बनना।
मुझे पढ़ना है, लिखना है, और अपना एक नाम बनाना है,
मुझे अपने ही पैरों पर खड़े होकर दुनिया को दिखाना है।
बाबुल के आँगन की चिड़िया हूँ, अभी चहकने तो दो,
मुझे अपने ही सपनों के आकाश में थोड़ा महकने तो दो।
क्यों हर बेटी के रास्ते को डोली की तरफ मोड़ देती हो?
माँ, मुझे शादी नहीं करनी... अभी मुझे जीने तो दो!
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4 घंटे पहले

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