तुम्हारे आने पर
तुम्हारे आने पर ऐसा प्रतीत होता है,
मानो सावन आ गया हो।
तुम्हारी आँखों में देखने पर ऐसा प्रतीत होता है,
जैसे मैं सावन की पहली बारिश में भीग रहा हूँ।
और तुम्हारे बाल संवारने पर मुझे ऐसा प्रतीत होता है,
जैसे सावन में फूल खिल रहे हों और सब कुछ हरा-भरा हो गया हो।
लेकिन कभी-कभी थोड़ा डर लगता है...
कि तुम सिर पर दुपट्टा डालकर छत पर चली जाओ,
तो लोग ईद की तारीख बदल देंगे!
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