आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

टीपू सुल्तान

                
                                                         
                            जिसने लेने ना दिया भारत के दुश्मनों को चैन,
                                                                 
                            
वो था विश्व का पहला मिसाइल मैन,
जो हो गया वतन के लिए क़ुर्बान,
वो था टीपू सुल्तान।।

जो अंग्रेजो के आगे ना झुका,
जिसके आगे दुश्मन ना रुका,
जो था मैदान-ए-मैसूर की शान,
वो था टीपू सुल्तान।।

जिसका फौलादी था सीना,
सिखाया जिसने शेरो की तरह जीना,
जिस पर फ़ख्र करें हिन्दुस्तान,
वो था टीपू सुल्तान ||

जो था आज़ादी का दीवाना,
जिसकी बहादुरी का कायल था जमाना,
जिसने दी आज़ादी के लिये जान,
वो था टीपू सुल्तान।।

दुश्मनों के खिलाफ भारत की ढाल बना,
अंग्रेजो की मौत का काल बना,
जिसने बचाया भारत का सम्मान,
वो था टीपू सुल्तान।।

ज़जसपर बरसती थी रहमत-ए-इलाही,
जो लडा था मैदान में बनकर सिपाही,
ना कर सका कोई जिसकी बहादुरी बयान,
वो था टीपू सुल्तान।।

जो था महान स्वतंत्रता सेनानी,
जिसके जज़्बे की थी दुनिया दीवानी,
बने जिसके जैसे हर ज़ईफ़ और जवान,
वो था टीपू सुल्तान।।

जिसे धोखा दिया मीर-सादिक़ ने,
उसी पर लिखा है मलिक-सादिक़ ने,
वो था शेर दिल इंसान,
वो था टीपू सुल्तान,

वो था टीपू सुल्तान...


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर