है गरभ वीर वो बना हुआ
अठरा वरश मे जगा हुआ
उस कुरुक्षेत्र के चंगुल मे वो वीर-धीर वो बंधा हुआ
फिर कुरुक्षेत्र के रंगमंच पर चक्रव्यूह था सजा हुआ
फिर अर्जुन शुत अभिमन्यु ने है हाथ धनुष को उठा लिया
और कहा करूँगा मै भेदन
फिर सबने है हुंकार भारी
फिर गूंज उठा फिर पांचजन्य अभिमन्यु सामान आंधी है चली
और चले धर्मयुधिष्ठिर सहदेव नकुल और संग भीम चले
कुछ हाथी घोड़े तेज चल कुछ पैदल सैनिक धीम चले
है पहुंचगाए कुरु के रण में फिर ऐसा तांडव नृत्य हुआ
कहीं पड़ा हुआ है सिर काटा
कहीं उठे धनुष से तेज धुंआ
है भेद दिया है तीन द्वार पर संग
कोई ना अपना था
है पूर्ण करूँगा युद्ध आज सौभद्र का ये ही सपना था
है कर्ण ने रथ को तोड़ दिया अभिमन्यु फिर निःशास्त्र हुआ
और कुद पड़ा कुरु के रण में और हाथ लिया रथ चक्क उठा
और टूट गया छः द्वार व्यूह का
शत्रु दल भयभीत हुआ
और कहा सुयोधन ने सबको सब वार करो इक संग में हाँ
और वार किया सिर के पीछे सौभद्र वहीं धरती पे गिरा
तब इक इक कर सातों ने मिलकर यह अधर्म निभाया है
निःशस्त्र पड़े अभिमन्यु के दिल पर सबने खंजर को चलाया है
जो धर्म का पाठ पढाते थे वही आज अधर्म कारहे साथ निभा
विश्राम हुआ फिर युद्ध वहाँ जहाँ धीर वीर वो गिरा मिला
है माया पति ने अंतिम छड़,यह सन्देश बताया है
अभिमन्यु ने जो कर्म किये उसका फल उसने पाया है
है कथा हुआ विश्राम यहाँ मै नाम लिखूं मै काम लिखूं
सब दिया हुआ है शम्भु ने श्री कृष्णा लिखूं या राम लिखूं
जय जय श्याम
- सचिन पटेल
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