वृषभानु दुलारी श्री राधे, अब हम पे कृपा भी कर देना।
मैं शरण तुम्हारी आया हूँ, चरणों की कृपा अब कर देना।
इस दुनिया में मैं उलझा हूँ, सब मोह-माया में अंधा हूँ।
मुझे चरणों की अपनी करके कृपा,
भव-सागर पार लगा देना।
वृषभानु दुलारी श्री राधे, अब हम पे कृपा भी कर देना।
ये तन मेरा इक काया है, सब जीवन की एक माया है।
मुझे चरणों में अपनी देकर शरण,
भव-सागर पार लगा देना।
वृषभानु दुलारी श्री राधे, अब हम पे कृपा भी कर देना।
ना धन चाहिए, न यश चाहिए, न ऊँचा कोई समा चाहिए।
मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए,
मुझ पे ऐसी कृपा अब कर देना।
वृषभानु दुलारी श्री राधे, अब हम पे कृपा भी कर देना।
हर श्वास में तेरा नाम रहे, हर पथ पर तेरा धाम रहे।
जीवन की इस अंधियारी में, बस तेरा नाम सदा ही रहे।
वृषभानु दुलारी श्री राधे, अब हम पे कृपा भी कर देना।
जब हो डगमग मन मेरा ये, और टूटे नातेदारी सब।
तब करके कृपा, श्री राधे,
मुझे दास तेरा बना लेना।
वृषभानु दुलारी श्री राधे, अब हम पे कृपा भी कर देना।
जब अंत समय मेरा आ जाए, और कंठ में प्राण अटक जाए।
मेरे होंठों पर तेरा नाम रहे,
और नयन तुम्हीं में रम जाएँ।
वृषभानु दुलारी श्री राधे,
अब हम पे कृपा भी कर देना।
इस दास को अपना बना लेना,
चरणों की कृपा तुम कर देना॥
वृषभानु दुलारी श्री राधे, अब हम पे कृपा भी कर देना।
मैं शरण तुम्हारी आया हूँ, चरणों की कृपा अब कर देना।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X