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वे जो अंतर्मुखी होंगे।

                
                                                         
                            ‎वे जो अंतर्मुखी होंगे
                                                                 
                            
‎कैसे जीते होंगे ?
‎अंदर ही अंदर हजारों गृहयुद्ध
‎खुद से लड़ते होंगे
‎और हार या जीत को प्राप्त होते होंगे।
‎
‎वे कभी सही ठहराते होंगे
‎अपनी हार की अवस्था को
‎कुछ ख़ास वजह ढूंढकर
‎और कभी गलत बन जाते होंगे
‎अपनी ही नजरों में गिरकर
‎इस तरह वे खुद में सिमटकर
‎कभी खुश और कभी उदास होते होंगे।
‎
‎वे बड़े द्वंद्व में जीते होंगे
‎और अंदर ही अंदर ख़ाक होते होंगे।
‎जब विचारों की लपटें तेज होती होंगी
‎तब खुद ही सागर बनकर
‎भीतर के विचाराग्नि को पी जाते होंगे।
‎
‎बाहरी दुनिया उन्हें
‎शायद ही कुछ समझती होगी
‎लेकिन खुद को और दुनिया को
‎वे कुछ ज्यादा ही समझते होंगे।।

 
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42 मिनट पहले

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