वे जो अंतर्मुखी होंगे
कैसे जीते होंगे ?
अंदर ही अंदर हजारों गृहयुद्ध
खुद से लड़ते होंगे
और हार या जीत को प्राप्त होते होंगे।
वे कभी सही ठहराते होंगे
अपनी हार की अवस्था को
कुछ ख़ास वजह ढूंढकर
और कभी गलत बन जाते होंगे
अपनी ही नजरों में गिरकर
इस तरह वे खुद में सिमटकर
कभी खुश और कभी उदास होते होंगे।
वे बड़े द्वंद्व में जीते होंगे
और अंदर ही अंदर ख़ाक होते होंगे।
जब विचारों की लपटें तेज होती होंगी
तब खुद ही सागर बनकर
भीतर के विचाराग्नि को पी जाते होंगे।
बाहरी दुनिया उन्हें
शायद ही कुछ समझती होगी
लेकिन खुद को और दुनिया को
वे कुछ ज्यादा ही समझते होंगे।।
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