आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दिन में चांद

                
                                                         
                            सूर्यग्रहण देखो, वह आया,
                                                                 
                            
सारे आसमान पर छाया।
सोचे नन्हा बालक,
क्या छिपी है इसमें काया?
दिन में चाँद कहाँ से आया?
आसमान से किरणें आए,
मेरे नेत्रों में हैं समाए।
बच्चों में जिज्ञासा लाया,
देखो चाँद कहाँ से आया।
सूर्यग्रहण देखो, वह आया,
सारे आसमान पर छाया।
- सानवी दुबे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर