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ठिठोली

                
                                                         
                            आँख-मिचौली
                                                                 
                            
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'चाँद तुम्हारी आँख-मिंचौली
बहुत हुई ये हंसी-ठिठोली
चांदनी तेरी हुई मेरी सहेली
निंदिया बगावतों पर है उतरी
अँखियाँ हुई मेरी सपनीली
पायलिया करती अठखेली
हथेलियों पर लालिमा छितरी
प्रिय की याद यूं दिल में बिखरी
श्रृंगार करूं ज्यों दुल्हिन नवेली
नवरंग की राह तकती मैं सजीली!

-सुजाता गुप्ता

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6 वर्ष पहले

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