जब मन में प्रेम भर जाता है,
तब क्यों अचानक एक दिन
प्रेम से मन भर जाता है?
जब मनभर प्रेम किया तब नहीं सोचा?
फिर अब अचानक क्यों प्रेम से मनभर लिया?
मन की सुनना अच्छी बात है.
लेकिन मन के चक्कर में पड़कर
क्यों प्रेम कर लिया?
और जब कर ही लिया था
फिर मन क्यों भर लिया ?
मनभर प्रेम करने के बाद
उससे मन कभी न भरने देना!
-सुजाता गुप्ता
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