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थोड़ी ही दूर पर

                
                                                         
                            थोड़ी ही दूर पर
                                                                 
                            

बैंक में शाम का समय था,
एक अमीर व्यापारी अपने
ब्रीफ़केस में ढेर सारा कैश
लेकर बाहर निकल रहा था ,
वह सोच रहा था कि अगले
दिन मज़दूरों की सैलरी के
लिए कंपनी में पैसे
जमा करने के वास्ते अपने
ऑफ़िस तक सुरक्षित कैसे पहुँचे।

बैंक के अधिकारी और कैशियर
पूरे दिन के काम के बाद ,
कैश बैलेंस का हिसाब
लिखने के लिए नोटों के
ढेर को गिनने में लगे हुए थे।

वहीं थोड़ी ही दूर पर,
एक भिखारी भीख में मिले
बहुत कम नोटों
को लेकर परेशान था,
उसे चिंता थी कि वह रात के
खाने का इंतज़ाम कैसे करेगा।
-सुबीर कुमार भट्टाचार्य
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2 घंटे पहले

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