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हिंदी कविता

                
                                                         
                            प्राकृतिक का नुकसान, क्यों कर रहा है स्वार्थी इंसान?
                                                                 
                            
देखो क्या मौसम रंग लाया है?
अपने कर्मों का फल पाया है।
कहीं बाढ़ कहीं सूखा,
कहीं अनाज कहीं लोग भूखा।
इससे क्यों बनता है अनजान,
प्राकृतिक का नुकसान, क्यों कर रहा है स्वार्थी इंसान?
पहाड़ों को तोड़कर, खनन को खोदकर।
पेड़ों को काटकर नदियों को रोक कर।
पानी बिना निकल रहा है प्रान।
प्राकृतिक का नुकसान, क्यों कर रहा है स्वार्थी इंसान?
क्या-क्या कृत्रिम चीजे बनाएगा?
ऑक्सीजन के बिना तुम तो मर जाएगा।
सारा कसूर खुद करते हो,
भगवान पर आरोप लगाते हो।
अपनी टेक्नोलॉजी पर मत कर इतना गुमान।
प्राकृतिक का नुकसान, क्यों
कर रहा है स्वार्थी इंसान?............ 
 
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2 महीने पहले

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