जिस दिन तेरे महफिल में आएंगे,
उस दिन कुछ लोग उठकर महफिल से चले जाएंगे।
कुछ तो बहाने बनाएँगे,कुछ तो अनजाने हो जाएंगे,
जिस दिन तेरे महफिल में आएंगे।
महफिल भी तेरा होगा, लोग भी तेरे होंगे
तालियां भी तेरे होंगे,
लेकिन तालियां मेरे नाम बजाए जाएंगे
जिस दिन तेरे महफिल में आएंगे।
कुछ बेगाने हो जाएंगे, कुछ तो दुश्मन बन जाएंगे,
कुछ तो असर है इन हवाओं में मेरा
जिधर चाहे उधर रुख मुड़ जाएंगे।
जिस दिन तेरे महफिल में आएंगे।
शांत बैठा हूं तो इसका मतलब यह नहीं
की कबूतर भी पर मार जाएंगे।
जब आवाज लगाएंगे, तो तेरे होश उड़ जाएंगे
जिस दिन तेरे महफिल में आएंगे।
तेरे नजरे मिलाने की औकात नहीं,
जब तेरे मेरे मुलाकात हो जाएंगे।
उस दिन कुछ सवालात हो जाएंगे
कौन क्या है सब पहचान जाएंगे?
लगी है आग पुआल में कुछ पल में धुआं बन जाएंगे
बच्ची राख कुछ मिट्टी में, तो कुछ हवा में उड़ जाएंगे।
जिस दिन तेरे महफिल में आएंगे।......
-रुपेश परदेशी
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