सबके होते हुए भीकभी-कभी
कितने अकेले हो जाते हैं हम
कहने को तो कितना कुछ है मन में
फिर भी इतना खामोश रह जाते हैं हम
भर जाती है कभी-कभी अपनीनजरे
इतना ज्यादा की उसे छुपाते रहते हैं हम
दिल में अपने दर्द छुपा कर
मुस्कुराते रह जाते हैं हम
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X