प्रेम राम सा हो तो सागर सेतु से बंध जाता है।
प्रेम राम सा हो तो पत्थर पानी पे तर जाता है।
प्रेम राम सा हो तो बाधा रस्ता रोक नहीं पाती,
प्रेम राम सा हो तो कांटों में भी बन पथ जाता है
प्रेम सिया सा हो तो रावण तुमको झुका नहीं सकता,
प्रेम सिया सा हो तो संकट तुमको डरा नहीं सकता।
प्रेम सिया सा हो तो फिर तिनका भी लाज बचाता है,
प्रेम सिया सा हो तो विजयी रावण भी डर जाता है।
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