दिल्ली पुलिस के मुखिया को,
मुखिया का ताज़ गवाना पड़ा।
बरत दिए थे जो नरमी,
जंतर मंतर के आंदोलन में।
देख नक्काशी आंदोलन की,
देश के मुखिया बिदक गए।
रातों रात बदल दिये,
दिल्ली पुलिस के मुखिया को।
जो नए मुखिया आये है अब,
कठपुतली बनके नाच रहे।
क्या होगा अब दिल्ली का,
ये तो अब मुखिया ही जाने।
पुलिसिया मुस्कान खिली रहेगी,
या अमानवीय ताज़ खिलाएंगे ।
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