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ये आँखो की बहस है

                
                                                         
                            ये आँखो की बहस है, पुराने यादो की है दासता।
                                                                 
                            
आदत सी हो गई है देखने की,दिल से नही जाता।
उम्र गुजर रही है, यादे वही की वही है।
वक्त गुजर रहा है, इस दिल मे प्यार आज भी है।
गुजरे हुवे वक्त को,भूल पाना मुश्किल सा लगता है।
आने वाली कल की,स्मृतियां बनती जा रही है।
वक्त की उलझन में,उलझते जा रहे हैं।
तू पास नही फिर भी,पास होते जा रही है।
दिल के अंदर,एक प्यार भरी घर बना रही है।
तुमसे दूर रह कर भी,तुझे छोड़ नही पा रहा हुँ।
पुराने ख्यालो में ,मैं डूबते जा रहा हुँ।
तेरा प्यार गहरा है, तुझे भूल नही पा रहा हुँ।
वक्त के साथ-साथ,प्रेम गहरा हो रहा है।
तू दूर हो कर भी,कितनी करीब लग रही है।
मानो जैसे तू मेरे जीवन को,छू रही है।
मेरे हृदय की अंतर भावो में,रह रही है।
मेरे यादो में वही दिन,वही पुरानी राते दिख रही है।
सुंदर सी सपना, आखो में झलक रही है।
तेरी पायल की झंकार,संगीत लग रही है।
तेरी ओठो की गुलाबी में,जीवन झलक रही है।
तेरी बालो की काली में,मोंगरे महक रही है।
तेरी माथो की बिंदिया में,चाँद चमक रही है।
तेरी चूड़ी की खनक भी,संगीत लग रही है।
तेरो ओ लाल दुपट्टा,हवा से बाते कर रही है।
मेरे मन की स्मृति पटल में,तेरी यादे रहती है।
तुझे कभी बसन्त तो,कभी सावन कहती है।
कभी हरियाली तो,कभी फुलवारी कहता है।
कभी चम्पा तो कभी,महकती चमेली कहता है।
कभी मोंगरे तो कभी,लाली गुलाब कहता है।
कभी पलास तो ,कभी मंदार कहता है।
मेरे स्मृति पटल में,सदा ही तेरा याद रहता है।
वक्त तो गुजर रही है, तेरे यादो के सहारे।
तू पास नही है, फिर भी लगती हो पास और किनारे।
चाहत दिल से था,कभी भुलाया नही जाता।
ये सच्ची प्रेम की दासता है, कभी भुलाया नही जाता।
वक्त के साथ,गहरा होता जाता है।
सच्ची मोहोब्बत भूल कर भी,भुलाया नही जाता है।
ये आत्मा की आवाज,किसी के दिल तक जाता है।
फिर यादे और स्मृति में,खो जाता है।
इसीलिए दूर रह कर भी,पास नजर आता है।
क्यो ?की दिल की मोहोब्बत,कोई ठुकराया नही जाता है।
दूर रह कर भी,हृदय में ही रह जाता है।
सारी उम्र स्मृति बन कर,रह जाता है।
भूल कर भी कोई,भुला नही पता है।
ता उम्र दिल मे स्मृति बन,रह जाती है।
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2 महीने पहले

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