तुझे देख सकता हुँ, महसूस भी कर सकता हुँ।
रात के हसीन सपनो में, बाते भी कर सकता हुँ।
तू बहुत दूर है मुझसे,पर दिल मे सदा रखता हुँ।
सच्चा प्यार है तुमसे,मेरे मन मंदिर में रखता हुँ।
ये आत्मा की आवाज,सायद तुम तक पहुचता ही होगा।
मेरे दिल की हसरत से,तुम वकीप ही होगा।
पुष्प सुमन से,तेरा दिल महकता ही होगा।
मेरे दिल की हर धड़कन,सुनता ही होगा।
तेरे कानो में हवाओ का गूंज,गूँजता ही होगा।
मेरे मन की हर बात,तुझे कहता ही होगा।
साथ नही हो साथी, पर जीवन साथ निभती है।
जिंदगी के हर सफर में तुम,मेरे ही साथ रहती है।
ये दुरियो का असर नही,हम सच्ची मोहोब्बत करते है।
सदा-सदा से ही साथी,तुमको दिल मे रखते हैं।
प्यार गहरा है, तुमसे दिल का लगाव गहरा है।
दुरियो में भी,रूहानी प्यार गहरा है।
साथ नही हो साथी,फिर भी तुम साथ चलती हो।
महसूस ऐसा होता है, जैसे तुम पास रहती हो।
मेरे अंतर मन के,हर कोने में निवास रहती हो।
मेरे जीवन सांसे बन कर,तुम चलती रहती हो।
पल -पल तेरे यादो में,और स्मृति में खोए रहते हैं।
सच्चा प्यार करते हैं तुमको,दिल मे बसाये रहते हैं।
जीवन की इस भाग-दौड़ में, भूल नही सकते है।
तुम जहाँ भी रहे,याद सदा हम करते रहते हैं।
तेरी सुखी जीवन का,दुवा हम करते रहते हैं।
तेरे सुंदर नयनो को,हृदय में बसाये रहते हैं।
प्यार सच्चा है साथी,सदा निभाते रहते हैं।
तेरे खुसिया देख कर,ये दिल महकते रहता है।
पैरों में ना चुभे काटा,दुव हम करते रहते हैं।
तेरे सुखी संसार का,सपना सजाये रहते हैं।
यादो के हर मंजर में,दिल मे सुकून भरते हैं।
तेरे चंचल आँखो को,प्यार सदा हम करते हैं।
तेरे ओठो की मुस्कान,स्मृति में बसाये रखते हैं।
तू सच्चा प्रेम है साथी,दिल मे सजाये रखते हैं।
सपनो की गलियारों में,तूझे बुलाया करते हैं।
मीठी-मीठी बातों से,रात गुजर करते हैं।
प्यार भरी समंदर में, डुबकी लगया करते हैं।
चांदनी रातो में,तेरे स्मृति में खोए रहते हैं।
कभी टिमटिमाते तारो में, कभी चाँद पर देखा करते हैं।
तेरे यादो की स्मृति,हर पल मेरे साथ रहता है।
तेरे प्यार की गहराई में,सदा ही डूबा रहते हैं।
तू पास नही रहती,फिर भी पास रहती है।
रात के अंधेरो में ,तेरा ही अक्स दिखा करती है।
सपनो के सागर में,मोती बन चमकती रहती है।
प्रेम की मर्यादा ,सदा ही निभाया करती है।
तू पास नही मेरे, फिर भी पास लगती है।
प्रेम भरी चंचल आँखो से,सपनो में देखा करती है।
ये दिल दूर कहाँ साथी,दिल मे ही तो रहती है।
कोई मौसम ऐसा नही,की तू साथ मेरे नही रहती है।
कोई रात ऐसा नही,सपनो में नही आती है।
मेरे जीवन सफर में,सुख-दुख में भी साथ निभती है।
अपने चंचल आँखो से,प्यार सदा बरसाती है।
पतझड़ और हरियाली में,भी साथ मेरे तू रहती है।
सच्ची प्यार भरी प्रकृति,हम तुमको कहते हैं।
बहती नदिया की धारा को, भी तेरा प्यार कहते हैं।
झरनों की बहती धारा को ,भी तेरा प्यार कहते हैं।
फूलो की बगानों को ,भी तेरा प्यार कहते हैं।
तितली के मुस्कानों को ,भी तेरा प्यार कहते हैं।
मधु के मिठास को ,भी तेरा प्यार कहते है।
सावन की बरसात को, भी तेरा प्यार कहते हैं।
बसन्त के बहार को,भी तेरा प्यार कहते हैं।
तेरे सच्चे प्यार को,जीवन का उपहार कहते हैं।
तू पास नही है साथी,फिर भी पास रहती है।
प्रकृति के हर मनोरम में,तेरा ही निवास रहती है।
हम जहाँ रहे साथी,तेरे स्मृति इस दिल मे रहती है।
यादो के मंजर में,हर जगह तुम ही तो रहती है।
जीवन की हर सांसो में,तुम्ही तो चला करती है।
तेरे सच्चा प्यार, मेरे दिल मे सदा पलती है।
दूर कहाँ है साथी, पास ही तो रहती है।
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