ओ प्यासे मन
पानी न मिलने पर
किसी का
रक्त मत पीना।
न किसी बड़े का
गुणगान करना—
केवल डर
और अपनी लालच के कारण।
तुम मत कुतरना
अपने
या किसी और के
पंख।
संभावनाओं के
हत्यारे मत बन जाना।
इतने बंदर मत हो जाना
कि तुम पर
घास न उग सके,
और बारिश का पानी
तुम्हारे भीतर
अटक न सके।
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