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हाथ थामे रखना

                
                                                         
                            ये तोड़ेंगे—
                                                                 
                            
कभी जाति के नाम पर,
कभी धर्म के नाम पर,
तो कभी ऊँच-नीच की दीवारों के नाम पर।
मगर मेरे साथियो,
तुम बस एक-दूसरे का हाथ थामे रखना।
क्योंकि जब हाथ मिलते हैं,
तब दिल जुड़ते हैं।
जब दिल जुड़ते हैं,
तब देश मज़बूत होता है।
तभी न्याय का सूरज उगता है,
समानता की हवा बहती है,
और हिम्मत का पर्वत
हर सीने में खड़ा होता है।
याद रखना—
जो हमें बाँटना चाहते हैं,
वे हमारी ताक़त से डरते हैं।
इसलिए साथ चलना,
साथ बोलना,
साथ लड़ना,
और साथ ही जीतना।
क्योंकि जब तक इस देश में
भेदभाव ज़िंदा रहेगा,
लोग दूसरों की धुन पर नाचते रहेंगे।
जिस दिन इंसान, इंसान को पहचान लेगा,
उस दिन न कोई ऊँचा होगा,
न कोई नीचा—
बस एक मज़बूत भारत होगा।
मेरे साथियो,
बस एक-दूसरे का हाथ थामे रखना।
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3 महीने पहले

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