तेरे दिल को महबूब जब भी कोई सितमगर सताएगा,
तुझे मेरा इश्क़ जरूर याद आएगा,
लोटे–लोटे की खटक से आवाज आई थी एक दिन,
तूं किस्सों में मेरा नाम अपने बच्चों को सुनाएगा,
मेरी कीमत भले ही न समझ आई हो तुझे संग रहके,
एक दिन इसी नाम का सिक्का तूं किसी गुल्लक में छुपाएगा,
सजदा न करूंगा, तूं खुद का खास भी बन जा,
मेरे लिए अब तूं ही मजारों में गांठ बांधकर आएगा,
रसगुल्ले को चासनी में डुबो दी है मैंने,
तुझे मेरे हाथ याद आएंगे जब भी तूं खाएगा,
मेरी बाहों को नापा था जिन हाथों से,
फंदे खुद से बढ़ जाएंगे, स्वेटर जब भी तूं बनाएगा,
ऊनी इश्क़ में गरमाहट ही मिलती है यारों,
दूसरों की खुशियां जलाकर दिल का थक्का जम जाएगा।
– ऋषभ भट्ट
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