ये पहली मुलाकात हो चाहे सब्ज क़दम,
या ज़दे–जिस्म पे लिखी कोई हार,
तुम इश्क़ बनके रहियो वो चाहें आई हो,
शजर–ए–इश्क़ मिटाने, बन सिपाह सालार।
– ऋषभ भट्ट
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