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बेबसी राजी नहीं

                
                                                         
                            दर्द ने घोला है कुछ ला जहर से,
                                                                 
                            
मौत आधी है और जिंदगी कुछ पहर से,
आंसुओं का बरसना बादलों से अनबन है!
या बेबसी राजी ही नहीं जाने को ठहर से?
– ऋषभ भट्ट
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3 महीने पहले

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