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बस तेरा सहारा

                
                                                         
                            भटका हूँ कब से राधे तेरे रहते,
                                                                 
                            
है आस पकड़ लोगी तुम बहते–बहते,
ये जीवन धारा है,
तू मेरा किनारा है,
अब पार लगूं जिस भी बस तेरा सहारा है।

– ऋषभ भट्ट
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एक घंटा पहले

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