आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बरसात की बूंदें आईं

                
                                                         
                            क्या कहेगी दुनिया, क्या ही कहेगा समाज?
                                                                 
                            
मैं तेरा हूँ बनके आया, तू बन जा मेरी आज,
एहतियात चालों में, रख सफ़र को तेरा नाम,
भटके कई मुसाफिर, कई भूल गए अंजाम,

बिन बात खिली फुलझडियां, पत्तें लीं अंगड़ाई,
तुम्हें डूबाने को मुझमें, हैं बरसात की बूंदें आईं,
ये होंठ दबी दांतों में, है कातिल तेरी अदाई,
तुम्हें डूबाने को मुझमें, हैं बरसात की बूंदें आईं।

मैं तुझको करता हूँ मैसेज, रात में छत पे भाग,
बातें मेरी सुनके घर का, जाए न कोई जाग,
याद में तेरी कटती है यारा, मेरी सारी रात,
तू सो जाती है कहके, जब ‘अभी मैं करती बात’,

ढूंढ रही थी सदियों से, हर बूंद कोई हुस्नाई,
तुम्हें डूबाने को मुझमें, हैं बरसात की बूंदें आईं,
तेरी हामी भरती हैं, पलकें झुकी हुई शरमाई,
तुम्हें डूबाने को मुझमें, हैं बरसात की बूंदें आईं।

तारें कदमों में रख दूँ, ला आसमान से सारा,
हो बाहों में भरने का, इकलौता तेरा इशारा,
तू रूह है मेरी, मैं तेरा चलता साया,
इंतज़ार में अबतक, था कितने सावन भरमाया,

तलाश मेरी ये आखि़र, ढूंढ ही तुझको लाई,
तुम्हें डूबाने को मुझमें, हैं बरसात की बूंदें आईं,
इश्क़ जताने को यारा है पकड़ी तेरी कलाई,
तुम्हें डूबाने को मुझमें, हैं बरसात की बूंदें आईं।
– ऋषभ भट्ट
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर