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तेरी गलियों से गुजरने का बहाना

                
                                                         
                            तेरी गलियों से गुजरने का एक बहाना मिल गया।
                                                                 
                            
एक तू जो मिला तो पूरा जमाना मिल गया।
तकल्लुफ है दूरियों को कि कैसे मुझे आसानी से तय कर लेते हैं।
तेरी ज़िद को तोड़ने का एक फसाना मिल गया।

तेरे बिन अब अकेले जिंदगी से बखूबी लड़ना सीख लिया।
तानो भरे शहर में अब तो जीना भी सीख लिया।
सीख लिया हमने अब तुमसे भी बातों को छुपाना
दर्द - ए- ग़म का ज़हर पीना भी सीख लिया।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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