किसी शब्दों के अर्थों में पिरोई जाऊं अच्छा है ।
किसी फूलों की खुशबू में महक जाऊं अच्छा है ।
है अच्छा किसी अपने से अपने को मिला पाऊं
किसी के ध्येय की मैं राह बन पाऊं तो अच्छा है ।
शहीदों की अमर गाथाओं में मैं गाई जाऊं अच्छा है ।
राष्ट्रहित के सवालों में मैं पाई जाऊं अच्छा है ।
है अच्छा की किसी के नेक भावों में समा पाऊं
किसी के कंठ को मै स्वर दिला पाऊं तो अच्छा है ।
बादल की बूंदों में मैं अमृत घोल पाऊं तो अच्छा है ।
जिंदगी की अनपढ़ी किताबों को खोल पाऊं अच्छा है।लहर नदियों की बनकरके रेतीले खेत में जाऊं
मिटा दे भूख जो भोजन वहीं बन पाऊं अच्छा है।
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