बेवजहों और हालातों पर
रोया जाता रोज़ नहीं।
मन के गढ़े हुए सपनों में
खोया जाता रोज़ नहीं।
जो हिस्से में रहा नहीं
वह है तुझसे दूर अभी।
देख घड़ी के सुईयों को
सोया जाता रोज़ नहीं।
-रिंकी गोस्वामी
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