हम रहें न रहें इस जहां में मगर,
मेरे प्यारे वतन तू हमेशा रहे।
ये तिरंगा सदा लहराता रहे
जब तलक ये जहां तू हमेशा रहे।
हम रहें न रहें ...................
तू अमर गाथाओं सा अमरता बने,
तू हिमालय के जैसा ऊंचा रहे ।
चांद तारों के जैसा चमकता रहे,
तू फूलों के जैसा महकता रहे ।
तू शहीदों की विधवाओं का आंचल बने,
जो जिंदगी को सजाता हमेशा रहे।
हम रहें न रहें .........................
मिलती शक्ति हमें तेरे रंगों से,
मन को उज्जवल करें मौलिक कर्तव्यों से।
हुए स्वतंत्र हम संघ के प्रयासों से,
मिले सब कुछ हमें मूल अधिकारों से ।
तू अमिट था, अमिट है,अमिट ही रहे,
भ्रष्ट लहरों से टकराता हमेशा रहे।
हम रहें न रहें .......................
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X