आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जीवन साथी

                
                                                         
                            प्यार और विश्वास से भरा,
                                                                 
                            
है यह रिश्ता अनोखा।
बंध जाते हैं प्रेम डोर में,
दो अजनबी यहां।

हर खुशी-ग़म एकदूजे का ,
सहृदय अपनाते हैं।
बनकर हमदम एकदूजे पर,
वो अपनी जान लुटाते है।
कभी नोक-झोक,
कभी करते हैं तकरार ,
तो कभी प्यार की बारिश में,

संग, संग वो नहाते हैं।
कदम जो कभी लड़खड़ाये,
बन कर हिम्मत हमस़फर का,
हौंसला वो बढ़ाते हैं।

छुट जाए चाहे साथ दुनिया का,
एकदूजे का हाथ ,न कभी छुड़ाते हैं,
जीवन के अंतिम समय तक ,
एकदूजे का साथ निभाते हैं।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर