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धरा का रहनुमा

                
                                                         
                            ये देश मेरा मैं देश का,
                                                                 
                            
फिर मैं क्यों कोई अगुआ देखूँ |

सनातन ग़ैर-सनातन ये उनकी भाषा,
मैं क्यों इससे इत्तेफ़ाक़ रखूँ ।

मैं मानव हूँ यही मेरी पहचान है,
मानवता हीं मेरी धरा की शान है ।

ग़र कोई नहीं तो मैं हीं सही,
तपती धूप में भी मुझे किसी से गिला नहीं ।

मैं सूरज हूँ एक आग का गोला हूँ,
मैं धरतीपुत्र- इस धरा का रहनुमा हूँ ।
 
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4 सप्ताह पहले

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