मैं शिव का हूं , शिव मेरे हैं ।
मैं शिव में हूं, शिव मुझमें हैं ।।
शिव ही प्रेम हैं, शिव ही भक्ति हैं।
शिव ही विश्वास हैं, शिव ही शक्ति हैं।।
शिव ही सूक्ष्म हैं, शिव ही संसार हैं ।
वो ही साकार और वो ही निराकार हैं ।।
वो तेज हैं, वो बल हैं ।
वो अन्धकार में भी उज्जवल हैं।।
शिव आदि हैं, अनंत हैं।
शिव ही तो परमानंद हैं ।।
मैं शिव में ही लीन हूं ।
उन्हीं में मैं विलीन हूं ।।
शिव प्रेम से सराबोर हूं ।
शिव भक्ति में भाव विभोर हूं ।।
मैं शिव का हूं , शिव मेरे हैं ।
मैं शिव में हूं, शिव मुझमें हैं ।।
- रवि कनौजिया "वासुदेव"
दक्षिणपुरी
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