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उनके सबक याद आते हैं

                
                                                         
                            जिनको अपना समझ के चाहा था,
                                                                 
                            
वो ही सबसे ज़्यादा याद आते हैं।

ज़ख़्म देते हैं मुस्कुरा कर जो,
वक़्त बीते तो याद आते हैं।

दर्द जब हद से गुज़रने लगता है,
झूठे वादे भी याद आते हैं।

भीड़ में भी अजीब तन्हाई हो,
छूटे चेहरे याद आते हैं।

जिनके लहजे में थी वफ़ा की क़सम,
उनके बदले हुए जज़्बात याद आते हैं।

जब भरोसे का घर बिखरता है,
आईनों में सवाल फिर से चले आते हैं।

दुश्मनों से तो शिकवा कम निकला,
चाय पर लड़ने वाले दोस्त ही बार-बार याद आते हैं।

अब किसी पर यक़ीन करने से,
दिल में कितने हिसाब आते हैं।

ज़िंदगी की उदास शामों में,
बेवफ़ा दोस्त नहीं, उनके सबक़ याद आते हैं।
-रतन कुमार कैथवास
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2 महीने पहले

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