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उबाल हो ऐसा खून चाहिए

                
                                                         
                            जो ठोकरों को भी सीढ़ी बना सके,
                                                                 
                            
हर एक ज़ख्म में ऐसा सुकून चाहिए।
मंज़िल ख़ुद चलकर दर पे दस्तक दे,
सफ़र में इतना फौलादी सब्र चाहिए।

समंदरों से सवालात कर सकें,
लहरों से लड़ने का फ़न चाहिए।
कश्तियाँ में किनारों पर जंग लग जाती हैं,
दरिया के बीचों-बीच जनून चाहिए।

जो रात भर अँधेरों से जूझ सके,
सुबह के सूरज-सा वो नूर चाहिए।
दीये हवाओं से डरते नहीं कभी,
सीने में जलता हुआ गुरूर चाहिए।

पहाड़ अगर रास्ते में खड़े मिलें,
चट्टानों जैसा अपना उसूल चाहिए।
रास्ता नहीं मिलता तक़दीरों से,
रास्ता बनाने का दस्तूर चाहिए।

जिस दिन इरादे फ़ौलाद बन गए,
किस्मत को भी हमारा हुक्म मंजूर चाहिए।
ताज उन्हीं के सिर पर सजता है,
जिन्हें मेहनत का भरपूर शुरूर चाहिए|

हार अगर सामने मुस्कुरा भी दे,
चेहरे पे वैसा ही सुकून चाहिए।
जो गिरकर फिर से उठ खड़ा हो जाए,
इंसान में ऐसा ही कद्दावर ख़ून चाहिए।

दुनिया सलाम उसी को करेगी एक दिन,
जिसे ख़ुद पर पूरा यक़ीन चाहिए।
तारीख़ बदलने वाले पैदा नहीं होते,
सीने में बस ऐसा जुनून चाहिए।

इसीलिए किसी ने सच ही कहा है, जो कि नीचे लिखा है…

जिसमें उबाल हो ऐसा ख़ून चाहिए,
जीत की ख़ातिर ऐसा जुनून चाहिए।
ये आसमान भी आएगा ज़मीं पर,
बस इरादों में ऐसी गूँज चाहिए।
-रतन कुमार कैथवास
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2 महीने पहले

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