सीधे-सीधे सावन को ही बुला लो, बारिश तो आ ही जाएगी,
सूखी धरती को थोड़ा सहला लो, हरियाली छा ही जाएगी।
बादल से क्यों रोज़ शिकायत है, गर मन में प्यास बची हुई,
खिड़की खोलो, बाँहें फैलाओ, बूँदें राह बना ही जाएँगी।
रूठे मौसम को मनाना है तो, कुछ गीत पुराने गा लेना,
मन की मिट्टी नरम पड़ेगी, खुशबू खुद ही आ ही जाएगी।
कब तक धूप से आँख मिलाओगे, कब तक प्यास छुपाओगे,
एक दुआ दिल से कर लेना, घटा स्वयं बरसा ही जाएगी।
हर चीज़ हिसाब से थोड़ी है, कुछ रिश्ते बादल जैसे हैं,
तुम आवाज़ ज़रा सच्ची देना, दूरी खुद मिटा ही जाएगी।
सीधे-सीधे सावन को ही बुला लो, बारिश तो आ ही जाएगी,
तुम दिल से बस द्वार खोल देना, ज़िंदगी मुस्का ही जाएगी।
-रतन कुमार कैथवास
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