मौसम के थपेड़े साइबेरिया वालों के लिए कोई इम्तिहान नहीं,
प्रकृति की खुली चुनौती है… जिससे बचना आसान नहीं।
सनसनाती हवा जब हड्डियों तक उतर जाती है,
माइनस की ठिठुरन रग-रग को हिला जाती है।
सुबह का सूरज भी वहाँ कुछ देर से मुस्कुराता है,
बर्फ़ का समंदर चारों ओर अपना राज़ जमाता है।
साँस लो तो लगता है हवा भी बर्फ़ बनकर आई है,
फिर भी इंसान ने वहीं अपनी ज़िंदगी बसाई है।
हम यहाँ थोड़ी ठंड में रजाई ढूँढ़ने लगते हैं,
वहाँ लोग माइनस में भी रोज़मर्रा के काम करते हैं।
कहना आसान है कि मौसम बड़ा बेरहम है वहाँ,
मगर साइबेरिया सिखाता है… हौसला हो तो जिंदगी रुकती नहीं यहाँ।
मानना पड़ेगा पहाड़ों जैसा कलेजा और हौसला है उनका…
-रतन कुमार कैथवास
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