सच-सच बताओ दिल से क्या दर्द हमको दे सकोगे,
हमेशा के लिए छोड़कर जाने का मन क्या बना सकोगे तुम।
इतना आसान नहीं है रिश्ता,
दो लफ़्ज़ कहकर मिटा सकोगे तुम।
हमने तो साँस-साँस में बसाया है तुम्हें,
क्या यादों से भी हमें भुला सकोगे तुम।
हमने आँधियों से दोस्ती निभाई है,
तूफ़ानों को भी मुस्कुराकर हराया है,
एक तेरे रूठ जाने भर से,
क्या हमें बिखरा हुआ पा सकोगे तुम।
ज़ख़्म देने का हुनर अगर रखते हो,
मरहम बनने की फ़ितरत भी सीखो,
पत्थर तो हर हाथ उठा लेता है,
क्या किसी टूटे दिल को उठा सकोगे तुम।
हम दरिया हैं, रास्ता बदल लेंगे,
साहिलों से मोहब्बत कम नहीं होगी,
तुम किनारे बदल भी लोगे अगर,
क्या अपनी प्यास मिटा सकोगे तुम।
हमने हर हार को सीढ़ी बनाया है,
हर गिरावट से कद और बढ़ाया है,
आज छोड़ भी दोगे साथ अगर,
कल खुद से नज़रें मिला सकोगे तुम।
याद रखना, दिल्लगी खिलौना नहीं होता,
वादा कोई मौसम नहीं होता,
जाते-जाते इतना तो बता दो,
इस फ़ैसले पर क्या उम्र भर मुस्कुरा सकोगे तुम।
-रतन कुमार कैथवास
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